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अमानव ( स १ - एपिसोड 3) - खलबली

पुलिस स्टेशन का दृश्य :


कॉन्स्टेबल : सर एक और ऍफ़ .आई.आर. दर्ज हुई है|
इ . राजेश : क्या ये भी सुबह वालो की तरह है?
कांस्टेबल : हाँ सर |
इ. राजेश : पता नहीं क्या हैं ये सब |

तभी इ. राजेश का होने बजता है , फ़ोन पर कमिशनर होते है :

इ. राजेश : गुड आफ्टरनून सर 
कमिशनर : गुड आफ्टर नून, राजेश ये सब क्या चल रहा है ? सुन रहा हु कोई सीरियल किलर आया है तुम्हारे इलाके  में |
इ. राजेश : जी सर सुबह से कई  ऍफ़ .आई.आर. आयी हैं | गुमशुदा की भी रिपोर्ट्स आयी हैं , में इस पर तफ्तीश कर रहा हूँ |
कमिशनर ( कड़कते हुए ) : तफ्तीश नहीं मुझे किलर चाहिए |
इ. राजेश : जी सर बिलकुल |
कमिशनर : और हाँ ! एक बात और अखबार और मीडिया को इस बाते की हवा भी नहीं लगनी चाहिए |
इ. राजेश : जी में इस बात का ध्यान रखूँगा | जय हिन्द सर |

(फ़ोन काट जाता है )

इ. राजेश एक सिगरेट जलाता है और अपने केबिन में बनी खिड़की के पास कुछ और सोचने लगता हैं |

दूसरी तरफ...... फ़ोन पर :

नितेश : हेलो निखिल कैसा है ?
निखिल : ठीक हूँ यार |
नितेश : एक सरकारी महकमे में टेंडर है चलेगा ?
निखिल  : चल तू पेपर वर्क कर ले फिर में चलता हूँ ....नहीं होगा तो मैंने अकेला चला जाऊंगा |
नितेश : ठीक हैं मै  तेरेको को डिटेल्स भेज रहा हु और एक कोटशन भी भेज रहा हूँ  तू देख लियो फिर  सब कुछ |
निखिल : ठीक हैं .............अच्छा सुन नेपाल वाली राइड के लिए विपुल ने अपडेट कर दिया है देख लियो |
नितेश : चल में देख लूंगा | अच्छा फ़ोन काट मयंक का कॉल आ रहा है वेटिंग पर |
निखिल : अच्छा बाई |

(फ़ोन कटता  हैं और मयंक लाइन पर आता हैं )

नितेश : हाँ बता 
मयंक : नेपाल राइड के बारे में देखा ?
नितेश : नहीं यार रुक देखता हूँ अभी निखिल  ने भी बताया |
मयंक : परसो रात में निकलना हैं |
नितेश : मुझे तो राइडिंग बूट्स भी लेने हैं यार |
मयंक : तो चल शाम में खरीद लेते हैं |
नितेश : चल देखता हूँ बताता हूँ थोड़ी ेर में |

उधर ::::

इ. राजेश  घंटी बजाता है , एक कांस्टेबल अंदर आता हैं :

कांस्टेबल : जी सर |
इ. राजेश : संग्राम सिंह को बुलाओ |
कांस्टेबल  : जी सर |


( संग्राम सिंह सब - इंस्पेक्टर था )

संग्राम सिंह : मैं अंदर आ सकता हूँ सर ? आपने मुझे बुलाया था |
इ. राजेश : हाँ आओ , तुमको पता होगा ही मैंने तुमको यहाँ क्यों बुलाया हैं |
संग्राम सिंह : जी सर , कल रात की वारदातों के लिए |
इ. राजेश : हाँ ऊपर से बहुत दबाव हैं , जल्दी से जल्दी ीोस केस को ख़तम करना हैं | लाशो को पोस्टमार्टम  के लिए भेजा  ?
संग्राम सिंह : हाँ सर और बाकी गुमशुदा लोगो के लिए भी तलाश जारी हैं |


तभी संग्राम का फ़ोन बजता है :

संग्राम सिंह : क्या ................रुको मैं पहुँचता हूँ |
इ. राजेश : क्या हुआ ?
संग्राम : सर चौक वाले कूड़ेघर के पास कुछ लाशें मिली हैं सामान हालत में |
इ. राजेश : चलो मैं भी चलता हूँ | पता नहीं क्या हो रहा हैं |

घटनास्थल  पर :
 संग्राम : लाशें  कहां हैं महात्रे ?
म्हात्रे : सर, लाशें पीछे रखी हैं , किसी को पता न चले इसिलए छुपा कर रखी हैं |


सब पीछे जाते हैं :

इ. राजेश : उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ...............
संग्राम : सर मारने का तरीका सामान हैं, एक ही आदमी ने मारा है इनको भी |
इ. राजेश : पता नहीं कौन हैं , कितनी बुरी तरह से चीर फाड़ रहा हैं  |










अमानव ( स १ - एपिसोड 3) - खलबली

संग्राम : समझ नहीं आता सर , पोस्टमार्टम के लिए भी क्या भेजें क्युकी , लाशो में कुछ छोड़ता ही नहीं हैं |
इ. राजेश : बात तो सही हैं पर करवाना तो पड़ेगा ही | भेजो सबको |


दो दिन बाद ( एक जगह राइडर्स की भीड़ )

विपुल : कैसे हैं सब लोग ?
भीड़ : उड़ने के लिए तैयार |
विपुल : वाह भाई वाह , तो सबने तैयारियॉं कर  ली होंगी | जैसा जैसा प्लान में था वैसे ही आगे बढ़ना हैं |
नितेश : हाँ चलना तो वैसे ही पड़ेगा  वर्ण किसी ने नेपाल में पकड़ लिया तो जमानत भी नहीं मिलेगी |

सब बड़ी तेज़ हस्ते हैं | राइड स्टार्ट होती हैं ...........थोड़े देर बाद :

विपुल : चलो सब लोग ४ ghante  हो गए चलते चलते यह रुक कर सब चाय पीकर आराम करके निकलते हैं |

मयंक : आ निखिल चाय पीते हैं |
निखिल : तू रुक यार मैं लाता हूँ , चिप्स खायेगा ?
मयंक : चल साथ में चलते हैं यार , नितेश तू भी आजा |
 नितेश : वो नया बंदा  कौन हैं जिसके बारे मैं तुमने बताया था |
मयंक ; पता नहीं दिख नहीं रहा यार | ोये विपुल इधर आ |
विपुल : हाँ बोलो भाई लोगो |
मयंक : रोहन नहीं आया क्या ?
विपुल : नहीं यार,  बोल रहा था की ऑफिस का कुछ काम हैं छुट्टी नहीं मिलेगी|
मयंक : हाँ ठीक हैं जो मन करें आओ जबरदस्ती मैं मज़ा नहीं |
विपुल ( चिल्लाते हुए ); चलो रफ़्तार के दीवानो आगे बढ़ा जाए |

सब आगे बढे, सुबह सब होटल पहुंचे :

विपुल : चलो सब आराम कर लो अपने अपने कमरें मैं |
निखिल : भाई मुझे मयंक के साथ ही रुकना हैं  हमे एक ह कमरा दे दो 
विपुल : ठीक हैं ..तो नितेश भी तुम दोनों के साथ ही रहेगा ...
नितेश : हाँ भाई बिलकुल ...
 
सब अपने अपने कमरों में चले गए :

नितेश : निखिल वो टेंडर् के पेपर्स दे आया था |
निखिल : हाँ   दे आया था | अधिकारी घूस मांग रहा था ...बोल रहा था १५% देना होगा |
नितेश ( गुस्से में हाथ मारता है दीवार में ): सब भ्रष्टाचारी हैं |
 
मयंक और निखिल उसकी कलाई पकड़ कर उसको शांत करते हैं 

मयंक : गुस्सा न हो सब चलता है याररर..

रात को सब आग जला कर हंसी मज़ाक  कर रहे  थे  ....तभी :

सुरेश :(नितेश यार ये मयंक और निखिल तो कट्टर दुश्मन थे पुरे क्लब में इनकी लड़ाई मशहूर थी  और आज बड़ी दोस्ती | तुम तो कोमन फ्रेंड हो तुमको तो पता होगा ये राज़ | देखो दोनों कैसे पहाड़ी पर बैठे हैं |

विपुल : रुको मैं बुलाता हूँ |
नितेश ( बीच मैं टोकता हैं) : रुक विपुल मैं जाता हूँ|

नितेश वहां जाता है और दोनों को आवाज़ देता हैं पर दोनों पत्थर बने चाँद को निहार रहे होते हैं 


क्रमश:.................







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9 Comments

Seema Priyadarshini sahay

08-Dec-2021 09:28 PM

बहुत ही रोचक

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Fauzi kashaf

02-Dec-2021 11:53 AM

Intresting

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Zaifi khan

30-Nov-2021 07:43 PM

بہت ہی عمدہ

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